संथाली जनजाति
झारखण्ड मे संथाल परगना प्रमंडल संथाल जनजाति का मुख्य रहने का स्थान है इसके अलावा धनबाद ,बोकारो ,गिरिडीह ,हज़ारीबाग ,चतरा ,कोडरमा ,सिंघभुम आदि जिला मे निवास करते है | प्रजातीय द्रिष्टि से इन्हे प्रोटो ऑस्ट्रलाइड समहू मे रखा जाता है | इनकी अपनी भाषा संथाली है जिसकी लिपि ओलचिकी है | संथालो को 12 गोत्र मे विभाजित किया गया है जो इस प्रकार है :- मुरमू, हाँसदा ,सोरेन ,हेम्ब्रम ,किस्कू ,बास्के ,बेसरा ,पोरिया ,टुडू ,गंडोवर ,चौड़े और मरांडी है | संथाल समाज अपने गोत्र चिन्ह के प्रति असीम श्रर्दा रखते है और कुछ तो अगयात भय भी रखते है | वे अपने गोत्र चिन्ह को ना तो मारते है ना ही नाश करते है और न उसको खाते है|
संथाल जाति मे अनेक प्रकार के विवाह का प्रचलन है परन्तु सगोत्री विवाह एक गम्भीर अपराध समझा जाता है | इनमे किरिंग बपला , किरिंग जबाई , इतुत ,निबोलोक , टुनकी दिपिल बापला ,घर दी जमाई ,सेवा विवाह, सांगा विवाह आदि विवाह प्रचलित है | इनमे किरिंग बपला सबसे प्रचलित विवाह है | वर (दूल्हा ) वधु पछ को एक मुल्य प्रदान करते है (हम कह सकते है की वर वधु पछ दहेज़ देता है ) जिसे पोन कहते है