Saturday, February 22, 2020

संथाली जनजाति

संथाली जनजाति 

जनसंख्या  की द्रिष्टि से संथाल जनजाति झारखण्ड की सबसे बड़ी जनजाति है और पुरे देश मे देखा जाये तो तीसरा सबसे बड़ी जनजाति है | गोंड पुरे देश  की  सबसे बड़ी जनजाति है और दूसरे स्थान पर            
झारखण्ड मे संथाल परगना प्रमंडल संथाल जनजाति का मुख्य रहने का स्थान है इसके अलावा धनबाद ,बोकारो ,गिरिडीह ,हज़ारीबाग ,चतरा ,कोडरमा ,सिंघभुम आदि जिला मे निवास करते है | प्रजातीय द्रिष्टि से इन्हे प्रोटो ऑस्ट्रलाइड समहू मे रखा जाता है | इनकी अपनी भाषा संथाली है जिसकी लिपि ओलचिकी है | संथालो को 12 गोत्र मे विभाजित किया गया है जो इस प्रकार है :- मुरमू, हाँसदा ,सोरेन ,हेम्ब्रम ,किस्कू ,बास्के ,बेसरा ,पोरिया ,टुडू ,गंडोवर ,चौड़े और मरांडी है | संथाल समाज अपने गोत्र चिन्ह के प्रति असीम श्रर्दा रखते है  और कुछ तो अगयात भय भी रखते है | वे अपने गोत्र चिन्ह को ना तो मारते है ना ही नाश करते है और न उसको खाते है| 
   संथाल जाति मे अनेक प्रकार के विवाह का प्रचलन है  परन्तु सगोत्री विवाह एक गम्भीर  अपराध समझा जाता है | इनमे किरिंग बपला , किरिंग जबाई , इतुत ,निबोलोक , टुनकी दिपिल बापला ,घर दी जमाई ,सेवा विवाह, सांगा विवाह आदि विवाह प्रचलित है | इनमे किरिंग बपला सबसे प्रचलित विवाह है | वर (दूल्हा ) वधु पछ को एक मुल्य प्रदान करते है (हम कह सकते है की वर  वधु पछ दहेज़ देता है ) जिसे पोन कहते है