Monday, March 2, 2020

नागवंशी शाशसन प्यवस्था

नागवंशी शासन प्यवस्था

प्रथम  शताब्दी (64 ईस्वी ) मे मुंडा प्रशासन प्यवस्था नागवंशी को हस्तांतरित हुई है | नागवंशी का प्रथम राजा फणिमुकुट राय ने पडहा प्यवस्था को समाप्त नहीं किया और न ही कोई परिवर्तन किया , बल्कि इसे विश्तार देने का ही प्रयास किये थे | 
फणिमुकुट राय का जन्म 64 ईस्वी मे हुआ था तथा उन्होंने 83 ईस्वी से 162 ईस्वी तक शासन किया था | 
माता -पार्वती (वाराणसी )
पिता -पुंडरीक नाग 
फणिमुकुट राय ने पंचेत राज्य के साथ वैवाहिक सबंध स्थापित किया था तथा गोवंशी राजपूत राजकुमारी के साथ विवाह कर अपनी स्थित और मजबूत कर ली थी 
पंचेतो के सहयोग से उसने क्योंझर राज्य पर विजय प्राप्त की थी | 
फणिमुकुट राय ने अपने राजधानी सुतियाम्बे (राँची )मे  एक सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था जिसमे पूरी के ब्राह्मण ने शुद्धिकरण का काम किया था | इसके लिये फणिमुकुट राय ने ब्राह्मण को दो ग्राम सोरांडा तथा महुगावा दान मे दिया  था | 
इसके बाद प्रताप राय ने राजधानी सुतियाम्बे से बदलकर चुटिया लाया था | चुटिया स्वर्णरेखा नदी के किनारे  बसा था | 
 इसके बाद भीम -कर्ण  ने खुखरा को राजधानी बनाया | 
और भीम सागर का निर्माण करवाया था | 
एनी साह ने रांची स्थित जगनाथ मंदिर  निर्माण 1691 मे  करवाया था | 

नागवंशी काल मे कर प्यवस्था,भू -कर प्यवस्था,शासन प्यवस्था सभी मुंडाओं की प्यवस्था जैसे ही थी | 
मुगलों का प्रवेश 
प्रथम शताब्दी से 16 वी शताब्दी तक इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ था | 
1585 ईस्वी मे मुग़ल आक्रमण के बाद ये धीरे धीरे परिवर्तन होना प्रारम्भ हुआ क्युकी उस वक़्त मुग़ल शाषक नागवंशी राजाओ से नजराना माँगते थे और ये धीरे धीरे नियमित रूप से नागवंशी शाषक से लिये जाने लगा जिसे मालगुजारी कहते थे | 
नियमित रूप से कर लिए जाने के कारण नागवंशी राजाओ को पुरे राज्ये का कर देना मे दिक्कत होने लगा | 
नागवंशी शासन प्यवस्था मे प्रजा से कर लेना की कोई  प्यवस्था नहीं था |
लेकिन बाद मे इस नियम को प्रवर्तित कर दिया गया और पट्टी के प्रमुख मानकी को प्रजा से कर लेने का आज्ञया   दी गई उसके बाद राजा ने अपने जागीरदारों को प्रजा से कर लेना का प्यवस्था करवाया जागीरदार नियमित कर लेना लगे परन्तु मुग़लो द्वारा मांगे जाने पर नजराना दिया जाता था 
  
1616 ईस्वी मे नागवंशी राजा दुर्जनशाल को जहाँगीर ने ग्वालियर के किले मे १२ वर्ष केद कर के रख दिया था क्युकी वे मालगुजारी या नजराना नहीं दे पा रहे  थे  बाद मे 6000 वार्षिक कर देना का विश्वास दिला का रिहा हुये थे |
अंग्रजो का प्रवेश 
1765 मे मुग़लो के द्वारा अंग्रजो को  दिवानी मिलने से  यहाँ अंग्रेज प्रवेश किये और पटना कॉउन्सिल का स्थापित कर के फॉर्ट विलयम के अधीन पटना कॉउन्सिल को रखा परन्तु इस क्षेत्र से कोई नियमित कर न मिलने का कारण 1773 ईस्वी मे छोटानागपुर खाश के लिए हिटली को प्रथम सिविल कलेक्टर नियुक्त किया गया पर इसे भी कर सग्रहण मे कोई सफलता नहीं मिली | 
कर की नियमित वसूली क लिये 1793 मे स्थायी बंदोबस्त के बहाने राजा -महाराजाओं को जमींदार बना दिया गया ओर अब राजा जागीरदारों का काम करने लगे और मुंडा और नागवंशी शासन प्यवस्था समाप्त हो गया था और राजा महाराजा बस अंग्रेजो के लिए बस कर वसूलने वाले बन कर रह गए थे और यही से अंग्रजो की विधि /शासन प्यवस्था प्रारम्भ होती है और मुंडा मनकी पड़हा राजा महाराजा शासन प्यवस्थासमाप्त हो गयी 
   

Saturday, February 22, 2020

संथाली जनजाति

संथाली जनजाति 

जनसंख्या  की द्रिष्टि से संथाल जनजाति झारखण्ड की सबसे बड़ी जनजाति है और पुरे देश मे देखा जाये तो तीसरा सबसे बड़ी जनजाति है | गोंड पुरे देश  की  सबसे बड़ी जनजाति है और दूसरे स्थान पर            
झारखण्ड मे संथाल परगना प्रमंडल संथाल जनजाति का मुख्य रहने का स्थान है इसके अलावा धनबाद ,बोकारो ,गिरिडीह ,हज़ारीबाग ,चतरा ,कोडरमा ,सिंघभुम आदि जिला मे निवास करते है | प्रजातीय द्रिष्टि से इन्हे प्रोटो ऑस्ट्रलाइड समहू मे रखा जाता है | इनकी अपनी भाषा संथाली है जिसकी लिपि ओलचिकी है | संथालो को 12 गोत्र मे विभाजित किया गया है जो इस प्रकार है :- मुरमू, हाँसदा ,सोरेन ,हेम्ब्रम ,किस्कू ,बास्के ,बेसरा ,पोरिया ,टुडू ,गंडोवर ,चौड़े और मरांडी है | संथाल समाज अपने गोत्र चिन्ह के प्रति असीम श्रर्दा रखते है  और कुछ तो अगयात भय भी रखते है | वे अपने गोत्र चिन्ह को ना तो मारते है ना ही नाश करते है और न उसको खाते है| 
   संथाल जाति मे अनेक प्रकार के विवाह का प्रचलन है  परन्तु सगोत्री विवाह एक गम्भीर  अपराध समझा जाता है | इनमे किरिंग बपला , किरिंग जबाई , इतुत ,निबोलोक , टुनकी दिपिल बापला ,घर दी जमाई ,सेवा विवाह, सांगा विवाह आदि विवाह प्रचलित है | इनमे किरिंग बपला सबसे प्रचलित विवाह है | वर (दूल्हा ) वधु पछ को एक मुल्य प्रदान करते है (हम कह सकते है की वर  वधु पछ दहेज़ देता है ) जिसे पोन कहते है